KYC (Know Your Customer) Full Detail Knowledge

KYC : आपके वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा का द्वार

KYC (Know Your Customer) केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। यह प्रक्रिया न केवल वित्तीय संस्थाओं को ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने में मदद करती है, बल्कि धोखाधड़ी, आतंकवाद के वित्तपोषण और अन्य वित्तीय अपराधों को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आइए, KYC के महत्व को कुछ उदाहरणों के माध्यम से समझते हैं:

  • धोखाधड़ी का रोकथाम: मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान चुराकर बैंक खाता खोलने और ऋण प्राप्त करने का प्रयास करता है। KYC के तहत, बैंक उस व्यक्ति की पहचान और पते का सत्यापन करेगा, जिससे धोखाधड़ी का पता लगाना और उसे रोकना आसान हो जाएगा।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक: KYC आतंकवादी संगठनों और अन्य अपराधियों को धन प्राप्त करने से रोकने में मदद करता है। बैंक, KYC प्रक्रिया के दौरान, लेनदेन के स्रोत और गंतव्य की जांच करते हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना और उन्हें रोकना संभव हो जाता है।
  • ग्राहक सुरक्षा: KYC ग्राहकों को धोखाधड़ी और उनकी जानकारी के दुरुपयोग से बचाता है। यदि किसी ग्राहक का खाता हैक हो जाता है, तो KYC डेटा बैंक को ग्राहक की पहचान सत्यापित करने और उसके खाते को सुरक्षित करने में मदद करता है।

KYC प्रक्रिया में क्या शामिल है?

KYC प्रक्रिया में आम तौर पर निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

  1. पहचान का सत्यापन: आपको अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों की प्रतियां जमा करनी होंगी।
  2. पता का सत्यापन: आपको अपना पता साबित करने के लिए बिजली का बिल, टेलीफोन बिल या बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेजों की प्रतियां जमा करनी होंगी।
  3. जोखिम मूल्यांकन: वित्तीय संस्था आपके लेनदेन पैटर्न और वित्तीय स्थिति का आकलन करके आपके जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करेगी।

KYC दस्तावेज जमा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

  • सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा जमा किए गए सभी दस्तावेजों की प्रतियां स्पष्ट और सुपाठ्य हों।
  • दस्तावेजों पर अपनी जन्म तिथि और हस्ताक्षर करना न भूलें।
  • यदि आप ऑनलाइन KYC प्रक्रिया का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप एक सुरक्षित और भरोसेमंद वेबसाइट का उपयोग कर रहे हैं।

KYC कराने के परिणाम:

  • यदि आप KYC के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करते हैं या सत्यापन प्रक्रिया में विफल होते हैं, तो आपका खाता खुलने में देरी हो सकती है या खारिज भी हो सकता है।
  • आपको कुछ वित्तीय सेवाओं तक पहुंच नहीं मिल पाएगी, जैसे कि ऋण, ऑनलाइन ट्रेडिंग, या डेबिट/क्रेडिट कार्ड।

निष्कर्ष:

KYC एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो वित्तीय प्रणाली को सभी के लिए सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। यह न केवल ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाता है, बल्कि वित्तीय संस्थाओं को नियामक आवश्यकताओं का पालन करने में भी मदद करता है। यदि आप बैंक खाता खोल रहे हैं, शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, या बीमा खरीद रहे हैं, तो KYC प्रक्रिया का पालन करना सुनिश्चित करें।

2002 में, भारत सरकार ने एक कानून बनाया. इस कानून के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ये ज़रूरी कर दिया कि सभी लोग जो बैंक, बीमा, या इन्वेस्टमेंट जैसी वित्तीय सेवाएं लेते हैं वो KYC कराएं. भले ही आपने पहले से खाता खोल रखा हो या नया खोलना चाहते हों, KYC कराना ज़रूरी है.

जब आप बैंक खाता खोलते हैं, या बीमा लेते हैं या शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करते हैं तो वो आपकी पहचान की जांच करते हैं. इस प्रक्रिया को ही KYC कहते हैं. KYC कराने के लिए आपको अपना आधार कार्ड या पैन कार्ड दिखाना पड़ सकता है. साथ ही ये भी बताना पड़ सकता है कि आप कहाँ रहते हैं. ये आमतौर पर सिर्फ एक बार ही कराना होता है, जब आप पहली बार कोई सर्विस लेते हैं.

ठीक है, ये ध्यान रखना ज़रूरी है! ज़्यादातर मामलों में KYC सिर्फ एक ही बार कराना होता है, लेकिन कभी-कभी कुछ बैंक या वित्तीय कंपनियां ये ज़रूरी कर सकती हैं कि आप थोड़े समय बाद दोबारा अपना KYC कराएं. इसे (verification) कहा जाता है.

इस दोबारा जांच के लिए आपको फिर से अपने दस्तावेज़ दिखाने पड़ सकते हैं, जैसे आधार कार्ड, पते का प्रमाण (बिजली का बिल वगैरह), और कभी-कभी आपकी कमाई का प्रमाण (इनकम प्रूफ) भी मांगा जा सकता है. अब तो ज़्यादातर बैंक और वित्तीय कंपनियां KYC को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन तरीका इस्तेमाल कर रही हैं. इसे eKYC (ई-केवाईसी) कहते हैं.

इस तरीके में आपको अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड या कोई और दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती. आप अपने फोन पर ही आधार से जुड़े एक पासवर्ड (OTP) की मदद से सीधे घर बैठे eKYC कर सकते हैं. इससे काफी समय बचता है!

KYC कराने के फायदे:

  1. वित्तीय अपराधों को रोकता है:
  • KYC मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करता है। बैंक KYC जानकारी का उपयोग संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट करने के लिए करते हैं।
  • उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के खाते में अचानक बड़ी रकम जमा होती है, और KYC के माध्यम से उस व्यक्ति की आय का स्रोत वैध नहीं पाया जाता है, तो बैंक लेनदेन को रोक सकता है और उसकी जांच कर सकता है।
  1. ग्राहक अनुभव में सुधार करता है:
  • KYC बैंकों को अपने ग्राहकों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है, जिससे वे अधिक व्यक्तिगत सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
  • उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक बैंक से लोन लेना चाहता है, तो KYC बैंक को ग्राहक की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और उसकी आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त लोन उत्पाद की सिफारिश करने में मदद करता है।
  1. सरकार को मदद करता है:
  • KYC सरकार को कर चोरी और अन्य वित्तीय अपराधों को रोकने में मदद करता है। KYC डेटा का उपयोग सरकार द्वारा करदाताओं की पहचान करने और उन पर नज़र रखने के लिए किया जाता है।
  1. अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सुगम बनाता है:
  • KYC अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को अधिक तेज़ और आसान बनाता है। KYC-अनुपालक संस्थानों के बीच लेनदेन को तेज़ी से संसाधित किया जाता है और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
  • आपकी पहचान साबित होती है: बैंक को पता चलता है कि आप वही हैं जो आप बता रहे हैं. इससे फर्जी खाते खुलने का खतरा कम हो जाता है.
  • आप किन सेवाओं के लिए योग्य हैं, यह पता चलता है : मान लीजिए आप लोन लेना चाहते हैं. KYC के दौरान आपकी कमाई का पता चलता है, जिससे बैंक यह तय कर सकता है कि वो आपको लोन दे सकता है या नहीं.
  • काले धन को रोका जा सकता है: KYC से पता चलता है कि आपका पैसा कहाँ से आ रहा है. इससे गैरकानूनी गतिविधियों को रोका जा सकता है.
  • बैंकों को घाटा नहीं होता: फर्जी लेनदेन से बैंक को नुकसान हो सकता है. KYC कराने से ऐसे लेनदेन पकड़ में आ जाते हैं.
  • हर किसी को सुरक्षा मिलती है: KYC से न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रहता है बल्कि बैंक और शेयर बाजार जैसी संस्थाएं भी सुरक्षित रहती हैं.
  • आपका डाटा सुरक्षित रहता है: KYC के दौरान जमा की गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है.
  • गलत कामों पर नज़र रखी जा सकती है: अगर कोई गलत काम करने की कोशिश करता है तो KYC की मदद से उसे पकड़ा जा सकता है.
  • बैंक और आपका रिश्ता मज़बूत होता है: KYC कराने से बैंक को आप पर भरोसा होता है और आपको बेहतर सेवा मिल पाती है.
  • पहचान पत्र दिखाने की झंझट कम हो जाती है: KYC एक बार कराने के बाद, आपको बार-बार दस्तावेज़ दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

ऑनलाइन KYC कैसे करें

चरण 1: जानकारी जमा करें

  • बैंक या कंपनी की वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले, आपको उस बैंक या कंपनी की वेबसाइट पर जाना होगा जहां आप KYC करना चाहते हैं। आप आमतौर पर होम पेज पर या “KYC” या “वित्तीय सेवाएं” टैब के तहत KYC पोर्टल पा सकते हैं।
  • ऑनलाइन फॉर्म भरें: आपको एक ऑनलाइन फॉर्म मिलेगा जिसमें आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें आमतौर पर शामिल हैं:
    • व्यक्तिगत जानकारी: नाम, पिता का नाम, पता, जन्म तिथि, लिंग, फोन नंबर, ईमेल पता
    • पहचान प्रमाण: आधार संख्या, पैन कार्ड संख्या, ड्राइविंग लाइसेंस संख्या, पासपोर्ट संख्या
    • पता प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, पासपोर्ट
    • वित्तीय जानकारी: बैंक खाता जानकारी, आय का स्रोत, निवेश विवरण (यदि लागू हो)

उदाहरण:

मान लीजिए आप XYZ बैंक में ऑनलाइन KYC करना चाहते हैं। आप उनकी वेबसाइट पर जाते हैं और “KYC” टैब पर क्लिक करते हैं। आपको एक फॉर्म मिलेगा जिसमें आपको अपना नाम, पता, जन्म तिथि, आधार संख्या, पैन कार्ड संख्या और बैंक खाता जानकारी दर्ज करने के लिए कहा जाएगा।

चरण 2: दस्तावेज जमा करें

  • स्कैन किए गए दस्तावेज अपलोड करें: आपको अपनी पहचान और पते के प्रमाण की स्कैन प्रतियां अपलोड करनी होंगी। आप आमतौर पर JPG या PNG प्रारूप में 2MB से कम आकार की फाइलें अपलोड कर सकते हैं।
  • आधार OTP सत्यापन: यदि आप आधार-आधारित KYC कर रहे हैं, तो आपको अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक OTP प्राप्त होगा। आपको फॉर्म में OTP दर्ज करना होगा। यह आपके आधार विवरण को सत्यापित करेगा।
  • फोटो कैप्चर: कुछ बैंक और कंपनियां आपको अपनी पहचान सत्यापित करने के लिए अपने मोबाइल कैमरे का उपयोग करके एक सेल्फी या आपके दस्तावेजों की तस्वीरें लेने के लिए कह सकती हैं।

उदाहरण:

XYZ बैंक में, आपको अपनी आधार कार्ड और पैन कार्ड की स्कैन प्रतियां अपलोड करनी होंगी। आपको अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP भी दर्ज करना होगा।

चरण 3: सत्यापन

  • बैंक या कंपनी आपके द्वारा जमा की गई जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। इसमें कुछ दिन लग सकते हैं।
  • वे आपसे अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेजों का अनुरोध भी कर सकते हैं। यदि वे किसी भी विसंगति या त्रुटि पाते हैं, तो वे आपसे संपर्क करेंगे।

उदाहरण:

XYZ बैंक आपके दस्तावेजों की सटीकता को सत्यापित करने के लिए विभिन्न एजेंसियों (जैसे आधार, UIDAI) के साथ डेटा का मिलान करेगा। यदि उन्हें कोई विसंगति मिलती है, तो वे आपसे स्पष्टीकरण के लिए संपर्क करेंगे।

चरण 4: पुष्टि

  • सफल सत्यापन के बाद, आपको एक पुष्टि ईमेल या संदेश प्राप्त होगा।
  • आप अब बैंक खाता खोलने या वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम होंगे।

उदाहरण:

XYZ बैंक आपको एक ईमेल भेजेगा जिसमें पुष्टि होगी कि आपका KYC सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। आप अब उनके बैंक खाता खोलने या अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए आवेदन करने के लिए पात्र होंगे।

KYC के लिए आवश्यक दस्तावेज (भारत में)

पहचान प्रमाण (Identity Proof):

  • आधार कार्ड: यह सबसे आम और स्वीकृत पहचान प्रमाण है।
  • वोटर आईडी कार्ड: यह एक और स्वीकृत पहचान प्रमाण है।
  • पासपोर्ट: भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों दोनों के लिए स्वीकृत।
  • ड्राइविंग लाइसेंस: फोटो और पते वाला ड्राइविंग लाइसेंस स्वीकार्य है।
  • फोटो वाला पैन कार्ड: पैन कार्ड स्वीकृत पहचान प्रमाण है, लेकिन केवल तभी जब उसमें फोटो हो।
  • सरकारी विभागों द्वारा जारी किया गया कोई भी फोटो वाला दस्तावेज: इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए फोटो वाले पहचान पत्र शामिल हैं, जैसे कि कर्मचारी पहचान पत्र, विधवा पेंशन कार्ड, आदि।

पता प्रमाण (Address Proof):

  • आधार कार्ड: आधार कार्ड में आपका पता भी होता है, इसलिए इसे पता प्रमाण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • वोटर आईडी कार्ड: मतदाता पहचान पत्र में आपका पता भी होता है, इसलिए इसे पता प्रमाण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पासपोर्ट: पासपोर्ट में आपका पता भी होता है, इसलिए इसे पता प्रमाण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पिछले 3 महीने से कम पुराना बिजली का बिल, गैस का बिल या पानी का बिल: यह पता प्रमाण का एक स्वीकृत रूप है।
  • सरकारी विभागों या निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जारी किया गया कोई भी दस्तावेज: इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पते वाले दस्तावेज शामिल हैं, जैसे कि राशन कार्ड, बैंक पासबुक, आदि।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है:

  • कुछ मामलों में, आपको पहचान प्रमाण और पते के प्रमाण दोनों की एक प्रति जमा करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • दस्तावेजों की प्रतियां स्पष्ट और अच्छी तरह से प्रकाशित होनी चाहिए।
  • यदि आप किसी दस्तावेज़ की प्रति ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि यह PDF या JPEG प्रारूप में है और इसका आकार 2MB से कम है।

KYC कराने के लिए कोई खास उम्र या इनकम जैसी शर्तें नहीं होती हैं. सिर्फ इतना ध्यान रखना होता है कि आपके पास जरूरी दस्तावेज़ हों. आप जिस तरीके से KYC कराना चाहते हैं उसके हिसाब से दस्तावेज़ों की ज़रूरत भी बदल जाती है.

ऑफलाइन KYC: अगर आप बैंक ब्रांच में जाकर KYC कराते हैं तो आपको वो दस्तावेज़ जमा करने होंगे जिनकी मैंने पहले लिस्ट बताई थी (पहचान पत्र और पते का प्रमाण). इन दस्तावेज़ों की मूल कॉपी या उनकी सेल्फ अटेस्टेड फोटोकॉपीज़ जमा करनी पड़ सकती हैं.

ऑनलाइन (eKYC): आजकल ज़्यादातर बैंक और कंपनियां ऑनलाइन KYC की सुविधा देती हैं. इसे (ई-केवाईसी) कहते हैं. इसके लिए आपके पास आधार कार्ड जरूर होना चाहिए. जब आप अपना आधार नंबर देते हैं और eKYC कराने की सहमति देते हैं, तो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आपकी आधार की जानकारी उस बैंक या कंपनी के साथ सुरक्षित तरीके से शेयर कर देता है. इस प्रक्रिया में आपको कोई भी दस्तावेज़ स्कैन करके जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है.

eKYC

तो कुल मिलाकर, KYC कराने के लिए कोई सख्त नियम नहीं हैं. आप अपनी सुविधा के हिसाब से ऑफलाइन या ऑनलाइन तरीका चुन सकते हैं और ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर अपना KYC पूरा कर सकते हैं.

KYC कराने के दो मुख्य तरीके हैं:

(Aadhaar-based KYC):
इस तरीके में आप KYC ऑनलाइन कर सकते हैं. आपके पास दो विकल्प हैं:

  •  (Aadhaar OTP-based online KYC): इसमें आपको अपने आधार से जुड़ा एक पासवर्ड (OTP) दर्ज करना होता है. यह सबसे आसान तरीका है.
  •  (Aadhaar-based Biometric KYC): इस तरीके में आपको अपनी उंगलियों के निशान देने होते हैं. यह थोड़ा जटिल है, लेकिन इसे भी आप घर बैठे कर सकते हैं.

(In-person KYC Verification):
इस तरीके में आपको बैंक ब्रांच जाना होता है. वहां आप अपने दस्तावेज़ जमा करके KYC करा सकते हैं.

(KYC kiosk): कुछ बैंक Branches में KYC कराने के लिए एक अलग मशीन होती है. इसे KYC कियोस्क कहते हैं. आप इस मशीन पर जाकर अपना KYC करा सकते हैं.

KYC कराने के दो आसान तरीके तो आप जान ही गए हैं – आधार कार्ड से ऑनलाइन और इन-पर्सन जाकर. लेकिन, एक और तरीका भी है जिसे (Centralised KYC) कहते हैं.

इस तरीके में आपको सिर्फ एक बार ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है. इस फॉर्म को सीकेवाईसी फॉर्म कहते हैं. फॉर्म भरने के साथ-साथ आपको अपने जरूरी दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी भी जमा करनी होती है.

जब आप यह सब जमा कर देते हैं, तो आपको एक खास 14 अंकों का अकाउंट नंबर मिल जाता है. यह अकाउंट नंबर भारत की एक संस्था, भारतीय प्रतिभूतिकरण आस्ति पुनर्गठन और सुरक्षा हित केंद्रीय रजिस्ट्री (CERSAI) (Central Registry of Securitisation Asset Reconstruction and Security Interest of India) के पास जमा हो जाता है. CERSAI आपके दस्तावेज़ों की जानकारी अपने डाटाबेस में सुरक्षित रूप से रखती है.

इसका फायदा ये है कि आपको बार-बार KYC नहीं कराना पड़ता है. एक बार CKYC करा लेने के बाद, आप भविष्य में किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था में आसानी से KYC करा सकते हैं. उन्हें सिर्फ आपका वह 14 अंकों का खास अकाउंट नंबर देना होगा.

What Is The Step-By-Step Process For KYC Online Verification?

  1. तरीका चुनना (Choose KYC Method): सबसे पहले आपको यह चुनना होगा कि आप किस तरीके से eKYC कराना चाहते हैं. दो मुख्य तरीके हैं:
  • आधार आधारित eKYC (Aadhaar-based eKYC): यह सबसे आसान और आम तरीका है. इसमें आपको अपने मोबाइल फोन पर आधार से जुड़ा एक पासवर्ड (OTP) दर्ज करना होता है. यह पासवर्ड उसी तरह से काम करता है जैसे आपके बैंक खाते से पैसे निकालते वक्त लगता है. UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) आपके आधार नंबर की मदद से आपकी पहचान की जानकारी को सुरक्षित रूप से बैंक या उस कंपनी के साथ साझा कर देता है जहां आप KYC करा रहे हैं.
  • वीडियो eKYC (Video eKYC): यह एक नया तरीका है, जो खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास आधार कार्ड नहीं है. वीडियो KYC में आपको अपने मोबाइल फोन का कैमरा चालू करके एक छोटा सा वीडियो रिकॉर्ड करना होता है. इस वीडियो में आपको अपना चेहरा दिखाना होता है और कुछ सवालों के जवाब देने होते हैं. ये सवाल आपकी पहचान और आपके द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित करने के लिए पूछे जाते हैं. उदाहरण के लिए, आपको अपने पैन कार्ड या पासपोर्ट जैसा कोई सरकारी दस्तावेज दिखाना हो सकता है और उसी दस्तावेज में लिखी जानकारी को वीडियो में बोलकर बताना पड़ सकता है.
  1. दस्तावेज़ जमा करना (Submit Documents): आपके चुने हुए तरीके के आधार पर आपको दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत पड़ सकती है या नहीं. Aadhaar OTP वाले तरीके में आपको आमतौर पर कोई दस्तावेज़ स्कैन करके जमा करने की ज़रूरत नहीं होती है. लेकिन, वीडियो KYC कराते वक्त आपको अपने दस्तावेज़ दिखाने पड़ सकते हैं. कुछ मामलों में, आधार OTP वाले तरीके में भी आपको पैन कार्ड की स्कैन कॉपी जमा करनी पड़ सकती है. यह बैंक या कंपनी के नियमों पर निर्भर करता है.
  2. कोड डालना या वीडियो बनाना (Complete Authentication):
    आपके चुने हुए तरीके के हिसाब से, आपको या तो आधार OTP दर्ज करना होगा या फिर वीडियो रिकॉर्ड करना होगा. सुनिश्चित करें कि आप एक शांत और अच्छी रोशनी वाली जगह पर हों ताकि वीडियो में आपका चेहरा और दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से दिखाई दें.
  3. जांच करना (Verification Review): आखिरी चरण में, बैंक या कंपनी आपके आधार की जानकारी या वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करेगी. यह जांच आमतौर पर कंप्यूटर द्वारा की जाती है, जो आपके आधार डेटा या दस्तावेज़ों में दी गई जानकारी से मिलान करता है. कुछ मामलों में कोई कर्मचारी भी इसकी जांच कर सकता है, खासतौर पर तब, जब वीडियो KYC किया गया हो.

इस पूरी प्रक्रिया के बाद आपका eKYC पूरा हो जाएगा. eKYC करने में कुछ ही मिनट लगते हैं और यह बैंक ब्रांच जाने से कहीं ज्यादा सुविधाजनक है.

यदि आप इस ब्लाॅग  को लास्ट तक पढ़े हैं तो आपने KYC के बारे में मुख्य-मुख्य बातें जान गये होंगे। जब ONPASSIVE में भी KYC करने के लिए OVERIFY का टूल आयेगा तो इसी तरह से आप KYC का पूरा प्रोसेस को आसानी से कर पायेंगे। धन्यवाद!

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