The Role of Artificial Intelligence (AI) Tools in Customer Segmentation

आजकल कारोबारों को ग्राहकों को लुभाने और उनके साथ जुड़ाव मजबूत करने में काफी परेशानी होती है. ज़्यादा ग्राहकों को ध्यान में रखकर मार्केटिंग बनाना मुश्किल है, इसलिए ग्राहक विभाजन (सेगमेंटेशन) एक कारगर रणनीति साबित हो रही है. इस तरीके से कंपनियां अपने ग्राहकों को अलग-अलग समूहों में बाँट सकती हैं, और हर समूह के लिए खास तौर से मार्केटिंग कर सकती हैं. इससे उनकी दिलचस्पी बढ़ाने और उन्हें अपना बनाए रखने में काफी मदद मिलती है.

लेकिन, परंपरागत तरीकों में ग्राहक विभाजन आसान नहीं है. उदाहरण के लिए, पहले खुद ही हाथ से डेटा का विश्लेषण करना पड़ता था, जो काफी समय लेने वाला काम है. साथ ही, जानकारी जुटाने के लिए सीमित डेटा स्त्रोत ही उपलब्ध थे. आजकल तो असली समय में मिलने वाले ग्राहक डेटा को हासिल करना भी एक चुनौती है. परेशानी ये भी है कि वक्त के साथ डेटा की मात्रा लगातार बढ़ती रहती है, जिससे उसका विश्लेषण और भी जटिल हो जाता है.

यही वजह है कि Artificial Intelligence (AI) और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकें ग्राहक विभाजन के क्षेत्र में क्रांति ला रही हैं. ये तकनीकें बड़ी मात्रा में मौजूद डेटा का तेजी से विश्लेषण कर सकती हैं, और ग्राहकों को उनकी खरीददारी के इतिहास, उम्र, लोकेशन जैसी चीजों के आधार पर सही समूहों में बाँट सकती हैं. इससे कंपनियों को अपने ग्राहकों को बेहतर तरीके से समझने और उनके लिए ज़्यादा प्रभावी मार्केटिंग रणनीति बनाने में मदद मिलती है.

Customer Segmentation Fundamentals

ग्राहक विभाजन का मतलब है कि ग्राहकों को उनके अलग-अलग गुणों के आधार पर छोटे-छोटे समूहों में बाँटना. कारोबार परंपरागत रूप से ग्राहकों को विभाजित करने के लिए उनकी मनोवृत्ति (मनपसंद), जनसांख्यिकी (उम्र, लिंग आदि), और उनके व्यवहार से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करते थे. उदाहरण के लिए, ग्राहक कितने साल के हैं, उनका लिंग क्या है, वो क्या काम करते हैं – ये सारी चीज़ें उनकी जीवनशैली को प्रभावित करती हैं, तो इन्हें विभाजन का आधार बनाया जाता था. साथ ही, ग्राहक किसी कंपनी की सेवा या उत्पाद के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, ये भी विभाजन में महत्वपूर्ण होता है.

Artificial Intelligence

आजकल तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि कंपनियां ग्राहकों की खरीदारी की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करके उनकी इच्छाओं को और भी बेहतर तरीके से समझ सकती हैं. इसे “खरीददारी का सफर” (पर्चेजिंग जर्नी) भी कहा जाता है. उदाहरण के लिए, कोई ग्राहक किसी E-Commerce website पर क्या देखता है, क्या चीज़ें कार्ट में डालता है, और आखिर में क्या खरीदता है, इस पूरे सिलसिले का विश्लेषण किया जाता है. इसी तरह, सोशल मीडिया पर ग्राहक किसी ब्रांड के बारे में क्या चर्चा कर रहे हैं, उसकी भावनाओं का विश्लेषण (सेन्टिमेंट एनालिसिस) भी किया जाता है. इससे कंपनियों को पता चलता है कि ग्राहक उनके उत्पादों या सेवाओं को लेकर क्या महसूस करते हैं.

साथ ही, नई तकनीकें ये भी बता सकती हैं कि कौन-से ग्राहक कंपनी के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं. इसे “ग्राहक लाइफटाइम वैल्यू” (CLTV) कहते हैं. CLTV की गणना करके कंपनियां उन ग्राहकों की पहचान कर सकती हैं, जिनसे उन्हें लंबे समय में सबसे ज्यादा मुनाफा होने की संभावना है. इस तरह ग्राहक विभाजन की मदद से कंपनियां अपने मार्केटिंग प्रयासों को ज़्यादा लक्षित बना सकती हैं, यानी उन खास समूहों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं जिनसे उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है.

ग्राहक विभाजन के परंपरागत तरीकों में दिक्कतें :

परंपरागत तरीकों से ग्राहक विभाजन करने में कई सारी दिक्कतें आती हैं, जो आज के जमाने के बिजनेस के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकती हैं. आइए इन दिक्कतों को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं:

  1. खुद हाथ से आंकड़े जुटाना: पुराने जमाने में किसी भी ग्राहक को समझने के लिए कंपनियों को कई अलग-अलग जगहों से जानकारी इकट्ठी करनी पड़ती थी. इसमें ग्राहक सर्वेक्षण, फीडबैक फॉर्म, या फिर बिक्री रिकॉर्ड जैसी चीज़ें शामिल थीं. इस सारी जानकारी को इकट्ठा करने और फिर उसका विश्लेषण करने में काफी समय और मेहनत लगती थी. नतीजा ये होता था कि कार्रवाई करने में भी देर हो जाती थी, और ग्राहक कंपनी से जुड़ाव खो बैठते थे.
  2. सीमित डेटा स्त्रोत: परंपरागत विभाजन सिर्फ उम्र, लिंग, या लोकेशन जैसी बुनियादी जानकारी (डेमोग्राफिक्स) पर निर्भर करता था. ये जानकारी जरूर कुछ हद तक ग्राहकों को समझने में मदद करती है, लेकिन ये पूरी तस्वीर पेश नहीं कर पाती. उदाहरण के लिए, ये तरीके ये नहीं बता पाते कि ग्राहक को किसी खास प्रोडक्ट में क्या दिलचस्पी है, वो ऑनलाइन कहाँ क्या देखता है, या सोशल मीडिया पर किस बारे में चर्चा करता है. इस तरह की गहरी जानकारी के बिना, कंपनियां ग्राहकों को उसी तरह से रिझा नहीं पातीं, जैसा कि आजकल मुमकिन है.
  3. असली समय के आंकड़ों की दिक्कत: आजकल ग्राहकों की ज़रूरतें और रुझान बहुत तेजी से बदलते रहते हैं. परंपरागत तरीकों से जुटाए गए आंकड़े अक्सर पुराने होते हैं, जिससे कंपनियों को ये पता नहीं चल पाता कि ग्राहक किन चीज़ों की तलाश में हैं. इसका मतलब है कि कंपनियां नये प्रोडक्ट लॉन्च करने या मार्केटिंग कैम्पेन चलाने के सही मौके गँवा देती हैं. इसके अलावा, असली समय के आंकड़ों की कमी से ये भी दिक्कत होती है कि ग्राहक किसी खास सर्विस या प्रोडक्ट के बारे में नकारात्मक महसूस कर रहे हों, तो कंपनियों को जल्दी पता नहीं चल पाता और वो उनकी शिकायतों को दूर करने में देर कर देती हैं.

Artificial Intelligence (AI) ग्राहक विभाजन की प्रक्रिया को कैसे बदल रहा है

परंपरागत ग्राहक विभाजन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए Artificial Intelligence (AI) काफी कारगर साबित हो रहा है. AI टूल्स की मदद से ग्राहक विभाजन का काम ज़्यादा तेज़ी से और सटीक तरीके से किया जा सकता है. आइए देखें कि AI की कौन-कौन सी तकनीकें ग्राहक विभाजन में अहम भूमिका निभा रही हैं:

  1. मशीन लर्निंग एल्गोरिदम: AI एप्लीकेशन का असली दिमाग मशीन लर्निंग एल्गोरिदम होता है. ये किसी भी तरह के बड़े डेटा सेट का बारीकी से विश्लेषण कर सकते हैं, और उसमें छिपे हुए पैटर्न, रिश्तों, और रुझानों को ढूंढ निकाल सकते हैं. उदाहरण के लिए, ये बता सकते हैं कि कौन-से ग्राहक ज्यादा खरीदारी करते हैं, किन चीज़ों को एक साथ खरीदना पसंद करते हैं, या किस तरह के ऑफर्स उन्हें ज़्यादा आकर्षित करते हैं.
  2. डीप लर्निंग: डीप लर्निंग थोड़ा जटिल एल्गोरिदम है, जो न्यूरल नेटवर्क नाम के सिस्टम का इस्तेमाल करके डेटा में मौजूद उलझे हुए रिश्तों को भी समझ सकता है. ये बता सकता है कि ज़्यादा जानकारी न होने पर भी ग्राहक किन चीज़ों को पसंद कर सकते हैं.
  3. नेचुरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): NLP टेक्स्ट और बोली जाने वाली भाषा को समझने में कंप्यूटर की मदद करता है. इसका इस्तेमाल ग्राहक विभाजन में कई तरह से किया जाता है. उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया पर ग्राहक किसी ब्रांड के बारे में क्या चर्चा कर रहे हैं, या कंपनी की कस्टमर सर्विस से बातचीत के दौरान कैसा महसूस कर रहे हैं, इसका विश्लेषण किया जा सकता है. NLP की वजह से कंपनियों को ग्राहकों की पसंद और नापसंद के बारे में जल्दी पता चल जाता है.

ग्राहक विभाजन में Artificial Intelligence (AI) के फायदे

ग्राहक विभाजन की प्रक्रिया में AI तकनीक को शामिल करने से कई फायदे मिलते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य फायदे नीचे बताए गए हैं:

  1. असली समय में आंकड़ों का विश्लेषण: AI की मदद से ग्राहक विभाजन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कंपनियां असली समय में ग्राहकों के आंकड़ों का विश्लेषण कर सकती हैं. पारंपरिक तरीकों में पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे ये पता नहीं चल पाता था कि ग्राहक किन चीज़ों को तलाश कर रहे हैं. लेकिन AI टेक्नोलॉजी से कंपनियों को ग्राहकों की पसंद-नापसंद और बाज़ार के रुझानों की तुरंत जानकारी मिल जाती है. इससे वो जल्दी फैसले ले सकती हैं और अपने मार्केटिंग अभियानों में बदलाव कर सकती हैं, ताकि नए अवसरों का फायदा उठा सकें. उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक ई-कॉमर्स कंपनी को पता चलता है कि गर्मी का मौसम आने वाला है और लोग ऑनलाइन सनस्क्रीन ढूंढ रहे हैं. इस जानकारी के आधार पर कंपनी जल्दी से सनस्क्रीन पर छूट की घोषणा कर सकती है या सनस्क्रीन के साथ-साथ धूप का चश्मा खरीदने पर विशेष ऑफर दे सकती है.
  2. बड़े डेटा सेट का विश्लेषण: आजकल कारोबारों को ढेर सारे जटिल आंकड़ों (बिग डेटा) को संभालना पड़ता है. इन आंकड़ों का विश्लेषण करना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन AI की मदद से ये काम आसान हो जाता है. मशीन लर्निंग नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके AI टूल्स बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं, चाहे वो डेटा किसी खास फॉर्मेट में हो या न हो. इससे कंपनियों को ग्राहकों के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलती है और वो उन्हें बेहतर तरीके से समझ पाती हैं. उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक की सोशल मीडिया पर क्या गतिविधि है, वो किन वेबसाइट्स देखता है, या वो ऑनलाइन किस तरह की चीज़ें खरीदता है – इस सारी जानकारी का विश्लेषण करके AI ये बता सकता है कि ग्राहक को किस चीज़ में दिलचस्पी है और भविष्य में वो क्या खरीद सकता है. इस तरह की जानकारी के आधार पर कंपनियां लक्षित विज्ञापन दिखा सकती हैं और खास ऑफर्स दे सकती हैं, जिससे ग्राहकों को कंपनी के साथ जुड़ाव बनाए रखने में आसानी होती है.
  3. ग्राहकों को बेहतर अनुभव देना (ग्राहक अनुभव को बढ़ाना) ग्राहकों को कैसा अनुभव होता है, ये कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. जितना ज़्यादा ग्राहक खुश होंगे, उतना ही ज़्यादा वो कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे और उससे खरीदारी करेंगे. AI टेक्नोलॉजी की मदद से कंपनियां अपने ग्राहकों को को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं. AI ग्राहक की ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियों का विश्लेषण करके उसकी आदतों, व्यवहार, दिलचस्पी और पसंद का पता लगा लेती है. इस जानकारी का इस्तेमाल करके कंपनियां हर ग्राहक के लिए अलग-अलग तरह के मार्केटिंग अभियान बना सकती हैं.

मान लीजिए किसी ग्राहक ने हाल ही में एक स्मार्टफोन खरीदा है और फिर ट्रैवल वेबसाइट्स ब्राउज़ कर रहा है. AI ये समझ सकती है कि ये ग्राहक शायद किसी ट्रिप की प्लानिंग कर रहा है. इस जानकारी के आधार पर कंपनी उस ग्राहक को ट्रैवल पैकेजों या होटल बुकिंग पर स्पेशल ऑफर दे सकती है. साथ ही, वो ग्राहक को पोर्टेबल चार्जर या वायरलेस ईयरबड्स जैसे ट्रैवल एक्सेसरीज़ खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है. इस तरह से AI टेक्नोलॉजी की मदद से कंपनियां हर ग्राहक को उनकी ज़रूरत के हिसाब से सुझाव दे सकती हैं, जिससे ग्राहक को खरीदारी का बेहतर अनुभव मिलता है और वो कंपनी के साथ लम्बे समय तक जुड़ा रहता है.

Artificial Intelligence (AI) उपकरणों से बिक्री बढ़ाना (कन्वर्जन रेट बढ़ाना)

आजकल के ज़माने में बाजार में बहुत सारी कंपनियां हैं, जो एक जैसे ही प्रोडक्ट बेचती हैं. ऐसे माहौल में किसी कंपनी के लिए ये ज़रूरी है कि वो अपने ग्राहकों को कुछ खास चीज़ें देकर उनकी तरफ आकर्षित करे. AI टेक्नोलॉजी की मदद से कंपनियां ऐसा कर सकती हैं. AI हर तरह के ग्राहक समूह (सेगमेंट) की ज़रूरतों और पसंद के हिसाब से अलग-अलग प्रोडक्ट्स या सर्विस दे सकती है. उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक ई-कॉमर्स कंपनी कपड़े बेचती है. AI ये बता सकती है कि युवा महिलाएं ज़्यादातर ट्रेंडी कपड़े पसंद करती हैं, जबकि उम्रदराज महिलाएं आरामदायक और टिकाऊ कपड़े लेना पसंद करती हैं. इस तरह की जानकारी के आधार पर कंपनी अपनी वेबसाइट पर अलग-अलग तरह के कपड़ों का कलेक्शन दिखा सकती है. साथ ही, वो हर ग्राहक समूह को उनकी पसंद के मुताबिक डिस्काउंट और ऑफर्स दे सकती है.

यही नहीं, AI ये भी बता सकती है कि किस ग्राहक को कौन-सा प्रोडक्ट दिखाना चाहिए और किस समय दिखाना चाहिए, ताकि वो उस प्रोडक्ट को खरीद लेने की संभावना सबसे ज़्यादा हो. इस तरह से कंपनियां सही ग्राहकों को लक्ष्य बनाकर (टारगेट करके) मार्केटिंग कर सकती हैं, जिससे उनकी बिक्री बढ़ती है और मुनाफा ज़्यादा होता है.

Implementing AI in Customer Segmentation

ग्राहक विभाजन में AI का इस्तेमाल करने के लिए कुछ रणनीतिक कदम उठाए जाते हैं, जो किसी भी बिजनेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं:

  1. कारोबार की ज़रूरतों को समझना: किसी भी नई टेक्नोलॉजी को अपनाने से पहले ये बेहद ज़रूरी होता है कि कंपनी ये समझे कि आखिर उसे किस चीज़ की ज़रूरत है. AI के मामले में भी यही बात लागू होती है. सबसे पहले कंपनी को ये गौर करना चाहिए कि ग्राहक अनुभव, मार्केटिंग रणनीति, और ग्राहकों के व्यवहार को लेकर उसे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरण के लिए, हो सकता है कि कंपनी को ये पता न चल पा रहा हो कि ग्राहक किन चीज़ों को खरीदना चाहते हैं, या फिर हो सकता है कि मौजूदा मार्केटिंग अभियान ग्राहक को रिझाने में नाकामयाब हो रहे हों. एक बार कंपनी को अपनी कमियों का पता चल जाए, तो वो ये तय कर सकती है कि किन क्षेत्रों में AI टेक्नोलॉजी लाने से उसे सबसे ज़्यादा फायदा होगा.
  2. ज़रूरी आंकड़े जुटाना: AI किसी जादू की तरह काम नहीं करती, बल्कि ये बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके काम करती है. इसलिए, ये ज़रूरी है कि कंपनी के पास शुरुआत से ही अच्छी गुणवत्ता वाला डेटा मौजूद हो. ये आंकड़े कई स्त्रोतों से जुटाए जा सकते हैं, जैसे ग्राहक संबंध प्रबंधन प्रणाली (CRM) सेल्स डेटा, सोशल मीडिया पर चर्चाएं, वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स पर ग्राहक की गतिविधियां, या फिर ग्राहक सेवाओं से हुई बातचीतों की रिकॉर्डिंग. हालाँकि, ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि सिर्फ डेटा की मात्रा ही काफी नहीं होती, बल्कि ये भी ज़रूरी है कि डेटा सही और पूरा हो. गलत या अधूरे डेटा से AI गलत नतीजे निकाल सकती है, जिससे कंपनी को नुकसान हो सकता है.
  3. सही मशीन लर्निंग मॉडल चुनना: AI कई तरह के एल्गोरिदम का इस्तेमाल करती है, जिन्हें मशीन लर्निंग मॉडल कहा जाता है. ये मॉडल बड़े डेटा सेट का विश्लेषण कर सकते हैं और उसमें से छिपे हुए पैटर्न और रुझानों का पता लगा सकते हैं. ग्राहक विभाजन के लिए कंपनी को ऐसे मशीन लर्निंग मॉडल चुनने होंगे, जो उसके लिए सबसे ज़्यादा कारगर साबित हों. उदाहरण के लिए, कुछ मॉडल आंकड़ों में मौजूद रिश्तों को उजागर करने में मदद करते हैं (linear regression), तो वहीं कुछ मॉडल बड़े डेटा सेट को छोटे और व्यवस्थित समूहों में बाँट सकते हैं (clustering). कंपनी को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से सबसे उपयुक्त मशीन लर्निंग मॉडल का चुनाव करना चाहिए.

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